पाँच सकारात्मकताओं की संस्कृति
पाँच सकारात्मकताओं की संस्कृति यह पूछे जाने पर कि क्या कारण है कि स्वतन्त्रता के सात दशकों से अधिक के बाद , कुछ क्षेत्रों में स्पष्ट प्रगति के बावजूद , भारत आज भी विकासशील देशों में शामिल है , एक वयोवृद्ध सज्जन , जो भारतीय गणराज्य के प्रथम 40 वर्षों में 38 वर्ष एक अखिल भारतीय सेवा के सदस्य रह चुके हैं , का उत्तर था , " हमारा डीएनए ही गड़बड़ है." किन्तु ऐसा बिलकुल नहीं है , हम भारतीयों का डीएनए वैसा ही है जैसा अन्य देशों के निवासियों का , परंतु दोष है पिछली दो-तीन शताब्दियों में हमारे देश में पनपी और बढ़ी सामाजिक एवं कार्य संस्कृति का. कुछ सम्माननीय अपवादों को छोड़ दें तो यह संस्कृति बेईमानी , अतिशयोक्ति , स्वयं को भी धोखा देने , गैर-ज़िम्मेदारी , कानून तोड़ने , अनुशासनहीनता और कार्य में अयोग्यता एवं अकुशलता की बन गई है. यदि भारत को लगभग डेढ़ अरब भारतीयों की प्रतिभा एवं उनको मिल रहे अवसरों के साथ न्याय करना है तो पूरे देश में वर्तमान में व्याप्त नकारात्मक संस्कृति के स्थान पर पाँच सकारात्मकताओं - सत्यनिष्ठा या ईमानदारी , श्रेष्ठता , कानून का पालन , ज़िम्मेदारी , और देशभक्ति - की...